शब्दोँ की कविता

Shabdon ke kavita

कविता है बहाव एक भावनाओं का,
बहता जाए इस जग में बिन ठहरे,
शुद्ध जल का जैसे हो एक चश्मा,
बस बहता ही जाए बिन ठहरे।

कहीं एहसास एक गर्माहट का,
कहीं एहसास एक शीतलता का,
बदलते रूप में बहती झरने के समान,
लाती जीवन नया इस सृष्टि में आज।

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एक एहसास

एक एहसासचाँद को देखा ,
तो एक एहसास सा हुआ,
क्यों है चाँदनी शीतल इतनी ,
श्वेत ठण्डे बर्फ के गोलों सी
चाँदनी का एहसास सा हुआ।

देती रोशनी उस काली रात में ,
सूर्य जब कहीं ग़मगीन हुआ ,
एह्सास इस बात का ,
दिल की गहराईओं तक हुआ।

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एक झरना

Ek Jharna

एक झरना वो ठन्डे ठन्डे जल का,
बहता लिए बहाव वो निर्मल जल का,
दे जाता सुकून छू कर सभी के मन को,
बह जाता उसका निर्मल जल कल कल करता।

झरना तो बस है जानता बहना,
झरना तो बस है जानता डगर बनाना अपनी,
झरना तो बस है बहता बिन कुछ सोचे और समझे,
झरना तो बस है जानता अपनी डगर पर बढ़ते जाना।

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कहाँ है, कहाँ है

कहाँ है, कहाँ है,कहाँ है, कहाँ है,
कोहरे का वो एक ठंडा सा एहसास,
वो उसका एक धुँधलापन,
वो उसकी एक चाहत,

समाने को सबकुछ अपने आगोश में,
वो उसका प्यार लेने को बेसब्र,
आगोश में अपने सब कुछ,
कहाँ है, कहाँ है,

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यादें

यादेंयादों का क्या है,
जब चाहे तब चली आती हैं,
हम तो इन्हे कभी नहीं बुलाते,
पर क्या करे ?

जब भी तन्हा होता हूँ,
आकर हमे गले से लगा लेती हैं,
आप तो सोहबत में आये ना कभी,
इन यादों का ही तो सहारा है,
यादों का ही तो भरोसा है,
और ये यादें,
खूबसूरत यादें,
प्यारी यादें,

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